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Friday, September 23, 2011

karina kapur


करीना कपूर का जन्म 21 सितंबर 1980 को मुंबई में हुआ, उस समय मुंबई की कुंडली के ग्रहों की स्थिति अनुसार करीना की जन्मकुंडली पर नजर डालें तो सूर्य कन्या राशि पर परिभ्रमण कर रहा था, जो जातक को बुद्धिमान व बलशाली बनाता है।

कुंडली में सूर्य स्थिति आपको भाग्यशाली बनाती है। सूर्य जातक को पूर्ण सहयोग प्रदान करता है। करीना के जीवन में बाधाएं तो आती हैं, आएंगी भी, परंतु सूर्य उन बाधाओं को दूर कर उन्हें सफलता दिलाएगा। धन का व्यय सत्कार्य में होता है। कुंडली में चंद्र की स्थिति करीना को पराक्रमी बनाती है। विपक्षियों को परास्त करने की क्षमता प्रदान कर‍ती है। इसके प्रभाव से बड़ा से बड़ा विपक्षी अथवा शत्रु परास्त हो जाता है।

कुंडली में बैठा मंगल करीना को ऐश्वर्यवान बनाता है। स्वयं के परिश्रम से धन अच्छा प्राप्त होता है। तुला राशि में स्थित मंगल पारिवारिक शुभ फल भी देता है। कुंडली में बुध जिस स्थान पर बैठा है वह पराक्रमी बनाता है एवं उच्च स्थान दिलाता है। भाग्योदय की दृष्टि से करीना की कुंडली बेहतरीन कही जा सकती है।

करीना के जन्म के समय ‍बुध उन्हें बुद्धिमान व धनवान दोनों बनाता है। कुंडली में गुरु केंद्र में है, जो सर्वत्र आदर दिलाता है। सुंदर तथा रूपवान भी‍ बनाता है। यात्रा में सफलता वाली स्थिति रहेगी। वर्तमान में गुरु ऐसे ही योग बना रहा है। ‍गुरु सिंह की राशि में स्थित होने के कारण उच्च स्थान दिलाता है।

शुक्र भी भाग्यवान, धनवान बनाता है परंतु इसके प्रभाव से कभी-कभ‍ी जातक अपने वालों को भी बैरी बना लेता है। शुक्र के प्रभाव के कारण गृहस्थ जीवन के प्रवेश में बाधा आ सकती है। दूसरे शब्दों में शादी की में अड़चनें आ सकती हैं। फिलहाल, व्यवहार व दोस्ती सोच-समझ कर करें, क्योंकि कर्क राशि में स्थित शुक्र आपको घमंडी भी बना सकता है। किन्तु शुक्र की शांति से सब ठीक हो जाएगा।

जन्मपत्रिका में विराजित शनि भाग्यशाली बनाता है व अनेक प्रकार के सुख प्रदान करता है। परंतु यह परिवार से दूर भी कर सकता है। कुंडली में राहु की स्थिति करीना को पसली में तकलीफ दे सकती है। अत: ध्यान देना चाहिए। अपनी मित्रता ध्यानपूर्वक निभाएं। हानि के योग बनते हैं। केतु भी मिश्रित प्रभाव डालता है।

करीना का जन्म चंद्र की महादशा में हुआ है, जिसका भोग्यकाल 4 वर्ष 11 माह 27 दिन रहा। वर्तमान में गुरु की महादशा चल रही है, जो कि 16 वर्ष की रहेगी जो 18-9-2010 से 18-9-2026 तक रहेगी। वर्तमान में गुरु महादशा में गुरु की अंतर्दशा 6-11-2012 तक रहेगी। उसके बाद शनि का अंतर 18-5-2015 तक रहेगा।

सितंबर माह करीना के लिए मिश्रित फल वाला रहेगा। अक्टूबर अच्छा लाभ देगा। नवंबर-दिसंबर माह भी लाभांश देगा। जनवरी पुन: मिश्रित फल वाला रहेगा। फरवरी प्रारंभ से अप्रैल तब बड़े ऑफर मिलेंगे। अप्रैल मध्य से मई तक अचानक लाभ मिलेगा। जून से अगस्त तक मध्यम रहेगा।

आपको 4, 6 एवं 14 तारीख को एवं मंगलवार को कोई भी बड़ा काम हाथ में नहीं लेना चाहिए। इन तारीखों को बड़ा कॉन्ट्रेक्ट साइन नहीं करना चाहिए। चौथे प्रहर में लंबी यात्रा के लिए घर से नहीं निकलना चाहिए। माणिक, पुखराज व हीरे का संयुक्त लॉकेट करीना को चमकदार सफलता दे सकता है।

Thursday, September 22, 2011

ptra pujan

पितृ हमारे वंश को बढ़ाते है, पितृ पूजन करने से परिवार में सुख-शांति, धन-धान्य, यश, वैभव, लक्ष्मी हमेशा बनी रहती है। संतान का सुख भी पितृ ही प्रदान करते हैं।

शास्त्रों में पितृ को पितृदेव कहा जाता है। पितृ पूजन प्रत्येक घर के शुभ कार्य में प्रथम किया जाता है। जो कि नां‍दी श्राद्ध के रूप में किया जाता है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन (क्वांर) की अमावस्या तक के समय को शास्त्रों में पितृपक्ष बताया है। इन 16 दिनों में जो पुत्र अपने पिता, माता अथवा अपने वंश के पितरों का पूजन (तर्पण, पितृयज्ञ, धूप, श्राद्ध) करता है। वह अवश्य ही उनका आशीर्वाद प्राप्त‍ करता है।

इन 16 दिनों में जिनको पितृदोष है वह अवश्य त्रि-पिंडी श्राद्ध अथवा नारायण बली का पूजन किसी तीर्थस्थल पर कराएं। काक भोजन कराएं, तो उनके पितृ सद्‍गति को प्राप्त हो, बैकुंठ में स्थान पाते हैं।

इन दिनों में किया गया श्राद्ध अनन्य कोटि यज्ञ के बराबर फल देने वाला होता है।

माता-पितामही चैव तथैव प्रपितामही।
पिता-पितामहश्चैव तथैव प्रतितामह:।।
माता महस्तत्पिता च प्रमातामहकादय:।
ऐते भवन्तु सुप्रीता: प्रयच्छतु च मंगलम।।
अपने पिता-पितामह, माता, मातामही, पितामही, माता के पिता, मातृ पक्ष, पत्नी के पिता, अपने भाई, बहन, सखा, गुरु, गुरुमाता का श्राद्ध मंत्रों का उच्चारण कर विधिवत‍ संपन्न करें। ब्राह्मण का जोड़ा यानी पति-पत्नी को भोजन कराएं। पितृ अवश्य आपको आशीर्वाद प्रदान करेंगे।

पितृ पक्ष में मन चित्त से पितरों का पूजन करें।

पितृभ्य: स्वधायिभ्य: स्वधानम:।
पितामहैभ्य: स्वाधायिभ्य: स्वधा:नम:।
प्रपितामहेभ्य: स्वाधायिभ्य: स्वधा:नम:।
अक्षन्पितरो मीम-दन्त पितेरोतीतृपन्त
पितर: पितर: शुध्वम्।
ये चेह पितरों ये च नेह याश्च विधयाश्च न प्रव्रिध।
त्वं वेत्थ यति ते जातवेद:
स्वधाभिर्यज्ञ: सुकृत जुषस्व।

इन यजुर्वेद के मंत्रों का उच्चारण कर पितरो का पूजन करे ! आपके पितृ  बेकुंढ़ में निबास करेगे!

इन दिनों में किया गया श्राद्ध अनन्य कोटि यज्ञ के बराबर फल देने वाला होता है।




शाहरुख खान का सूर्य जन्म कुंडली में जिस स्थान पर विराजित है वह उन्हें दूरदर्शी बनाता है। सूर्य के कारण ही शाहरुख जोखिम उठाकर दीर्घयोजना बनाने की सोच रखते हैं। यही सूर्य भविष्य में भी शाहरुख का सम्मान तथा वर्चस्व बनाए रखने में मदद करेगा।

कुंडली में चन्द्र की स्थिति शाहरुख की फिल्म 'रा वन' को श्रेष्ठ ऊंचाई तक ले जाएगी। हालांकि आरंभ में 'रा वन' की सफलता में बाधा के योग दिखाई दे रहे हैं परंतु मंगल की वर्तमान गोचर स्थिति भाग्योदय का संकेत दे रही है। साथ ही गुरु यश दिलाने के प्रबल संकेत दे रहा है।

शनि की महादशा में बुध की अंतर्दशा आर्थिक परेशानी की चेतावनी दे रही है। जो अगस्त 2012 तक रहेगी। शाहरुख की पत्नी गौरी अगर भगवान गणेश की आराधना करें तो शाहरुख इस स्थिति से उबर सकेंगे। 'रा वन' की सफलता के लिए भी गौरी को गणेश जी को ही मनाना चाहिए।

शुक्र की शुभता व अनुकूलता दर्शकों को फिल्म की ओर आकर्षित करेगी। सारे सितारों को मिलाकर देखा जाए तो फिल्म हिट होगी। राहु मिश्रित असरकारी है, जबकि शनि फिल्म 'रा वन' से शाहरुख को सम्मान की ओर ले जा सकता है।

सूर्य कुंडली पर दृष्टि डालें तो शाहरुख ने अपना सबकुछ जो भी दांव पर लगाया है वह सुरक्षित रहेगा। साथ ही सितारों के अनुसार अच्छा रिटर्न भी उन्हें मिलेगा।

दूसरी तरफ करीना के सितारे भी फिल्म को सपोर्ट कर रहे हैं। शाहरुख को एस्ट्रो सलाह है कि ‍फिल्म के रिलीज होने तक ज्यादा प्रचार से बचे! 


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Wednesday, September 14, 2011

पितृ पूजन ज्योतिष की नजर से

 पितृ पूजन ज्योतिष की नजर से --> पितृ हमारे वंश को बढ़ाते है! पितृ की पूजन करने वाले के परिवार में 
 सुख-शांति,धन,धान्य,यश, वैभव, लछ्मी.हमेशा बनी रहती है! संतान का सुख भी पितृ ही प्रदान करते है!
शास्त्रों में पितृ को पितृदेव कहा है! पितृ पूजन प्रत्येक घर  के शुभ कार्य में प्रथम किया जाता है! जो कि नादी-
श्राध्द के रूप में किया जाता है! भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन (क्वार) कि अमावस्या तक के समय को शास्त्रों ने
पितृपछ  बताया है! एन १६ दिनों में जो पुत्र अपने पिता,माता, अथवा अपने वंश के पितरो का पूजन (तर्पण, 
धुप, श्राध्द ) करता है, वह अवस्य उनका आशीर्वाद प्राप्त करता है! 
   एन १६ दिनों में जिनको पितृ-दोष है, वह अवस्य त्रि -पिंडी श्राध्द अथवा नारायण बलि का पूजन कराये !
नारायण बलि का पूजन किसी तीर्थ स्थल पर कराये ! इसी के साथ काक भोजन कराये, तो उनके  पितृ सदगति
को प्राप्त हो बैकुंठ में स्थान पाते है! 
   एन दिनों में किया गया श्राध्द अनन्य कोटि फल देने वाला होता है!



Friday, September 9, 2011

      जय श्री गणेश -गणेश जी आपके जीवन में हर ख़ुशी दे, एवं आपके जीवन के अन्धकार को दूर कर उन्नति का 
 प्रकाश दे!

Wednesday, August 17, 2011

मंत्रो की साधना में नियमो का पालन

          मंत्रो की साधना में नियमो का पालन-- मंत्रो की शक्ति असीम है! प्रयोग  करते समय विशेष सावधानी  !      बरतनी चाहिए! मन्त्र उच्चारण की तनिक-सी त्रुटी सारे करे -कराये पर पानी फेर देती है! यदि साधना   -काल में   नियमो का पालन न किया जाये,तो कभी- कभी बड़े घातक परिणाम सामने आ जाते है! इसी के साथ गुरु के ध्दारा  दिए गए निर्देशों का पालन साधक ने अवश्य करना चाहिए ! साधक को चाहिए कि वो प्रयोज्य वस्तुए जेसे -
    आसन ,माला, वस्त्र, हवन-साम्रगी तथा नियमो जेसे दीक्षा स्थान,समय एवं जप-संख्या आदि का द्र्द्तापूर्वक
       पालन करे! क्योकि विपरीत आचरण करने से मन्त्र तथा उसकी साधना निष्फल हो जाती है! जबकि-        विधिवत की गई साधना से इष्ट देवता की क्रपा सुलभ रहती है! साधना-काल में निम्न नियमो का पालन  अनिवार्य है  !
,    १.-जिसकी साधना  की जा रही हो, उसके प्रति पूर्ण आस्था !
             २. मन्त्र -साधना के प्रति पूर्ण विस्वास           ३. साधना-स्थल के प्रति विस्वास के साथ-साथ
   साधना का स्थान सामाजिक,     पारिवारिक  संपर्क से अलग हो! ४. उपवास में दूध, फल आदि          का,  सात्विक भोजन किया जाये,सोंदर्य -प्रसाधन,क्षोर- कर्म व् विलासिता का त्याग आवश्यक है! ५. साधना-काल में भूमि शयन करे! ६. वाणी का असंतुलन,कटु -भाषण,प्रलाप, मिथ्या -वचन आदि का त्याग करे, कोशिश मोन रहने की करे! निरंतर मन्त्र जप अथवा इष्ट-देवता का स्मरण-चिन्तन आवश्यक है!
          !     मन्त्र साधना में प्राय; विघ्न आते आप साबधानी रखकर  मन्त्र जप करे, अवस्य सफल होगे !

Thursday, August 11, 2011

65va स्वतंत्रता दिवस yevm भारत ka bhavisy

65va स्वतंत्रता दिवस yevm भारत ka bhavisy---->१५ अगस्त की suryoday ke samay कुंडली anusar es वर्ष bhart की प्रतिष्ठा bdaegi ! budh yevm shukr की ukti bhart ke snbndh dusare देशो se सुधारने वाली rahegi ! rahu की स्थिति विपरीत घटना -krm ko janm dene वाली रहेगी shani yevm any grho की स्थिति ashganti aantrik birodh aantakvadi ghgatnakrm की snbhavana banati hai! aarthgik bikas pr prbhav
pdhega ! svatntr bhart yevm vrtman कुंडली se varsh कुंडली pr najar  dale to bhurn htyayo me vrdhi hogi! SHTRU BHART ke prajit hoge ! mitr rasht hmare desh ke prti samrpit
hoge ! esi ke sath mitr देशो se visvas yevm sahayog की bhavna milegi! bhom की sithiti krshi shaetr ko prbhavit kregi ! prakrtik prkop ke karan kee  logo ko visthapit hona pdega! bchcho pr atyachar badane की snbhavna banti hai ! vighan ke shaetr me bhart achhi unnti krega ! videshi pnji kamane bhart agrni rahega ! mhilaao ko ksht  ka samana krna partega! shiksha ke kshaetr me bhart achhi unnti krega! stta pksha ke neta aapsi talmel nbhi bana payege! vipakshai paksha havi hoga! sarkar pr khatra mndrata rhega!