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Tuesday, June 12, 2012

गुरु का परिभ्रमण

गुरु का परिभ्रमण -->चन्द्र कुंडली अनुसार जब गुरु परिभ्रमण पर रहते है,किस स्थान पर क्या परिणाम देते है,एवं उनसे क्या लाभ या हानि होती है!
जानिये!
प्रथम भाव में-->आर्थिक कष्ट चिंताए घेरती है,यात्रा होती है! परन्तु रिश्तेदारों से मनमुटाव होता है!
ध्दितीय भाव में--> घर में ख़ुशी आती है,अविवाहित का विवाह होता है,एवं ग्रहस्थी वाले के घर बच्चे का जन्म होता है,धन की प्राप्ति होती है!
अर्थात पूर्ण सुख मिलाता है! इसी के साथ शत्रुयो का नाश होता है!
तृतीय भाव में--> धन की कमी होती है,रिश्तेदारों से कटुता एवं कार्य में असफलता मिलाती है,बीमारी का भय रहता है,यात्रा में नुकसान होता है,
इसी के साथ स्थान परिवर्तन होता है!
चतुर्थ भाव में-->जातक किसी मित्र या रिश्तेदार से अपमानित होता है,जातक का गलत कार्य के लिय मन विचलित होता है, एवं चोरी का भय
बना रहता है!
पंचम भाव में-->राजकार्य में सफलता मिलाती है,उच्च अधिकारियो से सम्मान मिलता है,एवं जातक को नये पद की प्राप्ति होती है, सन्तान की प्राप्ति होती है,वेरोजगार को नोकरी मिलती है,घर शुभ कार्य होता है, गुरु के पंचम भाव में रहने से जमीन-जायदाद एवं एनी बैभव विलासिता की क्स्तुयो की खरीददारी होती है!
षष्टम भाव में--> घर में झगड़े होते है,रिश्तेदारों से मान मुटाव की स्थिति उत्पन्न होती है! एवं धन होती हा!
सप्तम भाव में--> परिवार में ख़ुशी आती है,शादी व नये सम्बन्ध होते है,धन की प्राप्ति होती है,बाहन सुख तथा बच्चे का जन्म होता है!
अष्टम भाव में-->कई प्रकार के कष्ट देता है!
नवम भाव में--> ज्ञान के साथ कार्य करने की दक्षता बदती है!
दशम भाव में--> बीमारी धन हानि होती है! जायदाद का नुकसान होता है, स्थान परिवर्तन होता! अर्थात जीवन कष्टमय हो जाता है!
एकादश भाव में--> जीवन में खुशिया आती है,धन की प्राप्ति होती है,भूमिहीन को भूमि मिलती है,अविवाहित का विवाह होता है!एवं ग्रहस्थी वाले
के घर बच्चे का जन्म होता है!
ध्दाद्श भाव में--> कष्टप्रद जीवन होता  है! मानसिक शारीरिक,बोध्दिक कष्ट होता है! 
गुरु विपरीत परिणाम दे तो, गुरु शांति करना हाहिये,एवं गुरु का दान लक्ष्मी-नारायण मंदिर में या किसी गुरु को दे!
गुरु का यह दान है--> पीला कपड़ा, चने की दाल,सोने की वस्तु हल्दी की गाँठ,पीला फुल,पुखराज,पुस्तक,शहद,शक्कर,भूमि छाता इत्यादी देना चहिये! ,





Friday, June 1, 2012

जून २०१२ ज्योतिष की नजर

जून २०१२ ज्योतिष की नजर -->माह की कुंडली में केंद्र में पाँच ग्रह एक साथ बैठे है, इसके प्रभाव से पृथ्वी पर अशांति कलह भय का वातावरण
रहेगा! वाहन दुर्घटना,आतंकवाद,रेल दुर्घटना का भय रहेगा!  शुक्र के कारण पृथ्वी पर थोड़ी शांति आ सकती है.इस माह सोने का भाव स्थिर रहेगा. चाँदी के भाव में थोड़ा उतार-चढाव रहेगा! जानवरों पर कष्ट रहेगा, स्त्री को पीड़ा रहेगी, कही जलप्लायण,कही गर्मी  से लोंग परेशान होंगे!

राष्ट्रविरोधी तत्व मुखर होंगे एवं अशांति एवं भय का वातावरण बनेगा! इराक,इटली,अमेरिका,हालैंड,जर्
मनी,ईरान,पोलैंड,भारत इस योग से प्रभावित होंगे! धान्य का प्राकृतिक कारणों से नुकशान होंगा! बुध का राशि परिवर्तन करने सेचंदी महंगी होने की सम्भावना बनती है,१५ मई
को सूर्य अपनी राशि बदलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा, जिसके परिणाम स्वरूप पश्चिम के देशो में सुर्भिक्ष आदि शुभ फलो का सुख होगा,
पूर्व तथा उत्तर के देशो कष्ट अशांति तथा दक्षिन के में युध्द आदि का भय बना रहेगा!
इस माह की कुंडली  को आकाशीय द्रष्टि से देखा जाये तो,तेज गर्म वायु से लोंग त्रस्त रहेंगे! प्राकृतिक प्रकोप,आंधी-तूफान से कुछ भागो में लोंग ज्यादा त्रस्त रहेंगे !  केतु-मंगल शनि की स्थति को देखे तो,तेज वायु के साथ कही-कही वर्षा भी होंगी! या तेज बदल के साथ बुन्दवंदी भी होगी!आसाम,महाराष्ट्र,उड़ीसा,केरल,में कही-कही अच्छी वर्षा भी होंगी!  

जून २०१२ में ध्दाद्श राशियों का फलादेश

जून २०१२ में ध्दाद्श राशियों का फलादेश --मेष-->मेष राशि वाले जातको के लिए यह माह सामान्य रहेगा! व्यापार मध्यम रहेगा,कृषि सामान्य फल देगी, मासिक पीड़ा रहगी, शारीरिक  कमजोरी रहेगी, वाहन एवं यात्रा से कष्ट के योग है,साबधानी रखे! फिजूल खर्च  बढ़ेगा ! व्यवहार से पूर्ण सफलता मिलेगी! दिनांक ५.१० शुभ है,२३ अशुभ है! रामरक्षास्त्रोत का पाठ फायदेमंद रहेगा!
वृषभ--> वृषभ राशि वाले जातको के लिए यह माह कोर्ट-कचहरी में सफलता वाला रहेगा!  परिवार में सुख मिलेगा! व्यापार अच्छा  रहेगा,कृषि ठीक
रहेगी, नॉकरी में उन्नति होगी! यात्रा के योग है, शत्रु पक्ष से निजात मिलेगी! ३,१५ शुभ है, १० अशुभ है! शिव आराधना शुभ है!
मिथुन--> मिथुन राशि वाले जातको के लिए यह माह लाभ वाला रहेगा! विधार्थी को सफलता मिलेगी,शिक्षा की स्थिति मजबूत होगी, पत्नि को कष्ट रहेगा, शत्रु पराजित होंगे! व्यापार लाभ देगा, कृषि लाभप्रद रहेगी, नोकारी में सफलता रहेगी!  दिनांक १७,२६ शुभ है, ५ अशुभ है! शिव शक्ति आराधना लाभप्रद रहेगी!
कर्क--> कर्क राशि वाले जातको के लिए यह माह जमीं जायदाद से लाभ वाली रहेगी! व्यापार मध्यम रहेगा,नॉकरी में अधिकारी खुश रहेंगे! विधा के कार्य में परेशानी आएगी,पारिवारिक कलह रहेगा,नेत्र पीड़ा के योग बनते है, ध्यान रखे! दोस्त से सहायता मिलेगी! दिनांक ११, १८ शुभ है, ४ अशुभ है! शिव शक्ति आराधना शुभ है!
सिंह--> सिंह राशि वाले जातको के लिए यह माह पराक्रम वृध्दि वाला रहेगा! पारिवारिक सुख में वृध्दि होगी, वाहन सम्वन्धी सुख मिलेगा, बिधार्थी को सफलता मिलेगी! व्यापार मध्यम रहेगा, कृषि लाभ देगी, नॉकरी में सफलता मिलेगी! रिश्तेदार से सहायता मिलेगी! १८,२२ शुभ है,
२९ अशुभ है! श्री कृष्ण की आराधना शुभ है!
कन्या--> कन्या राशि वाले जातको के लिए यह माह सामाजिक कार्यों से लाभ वाला रहेगा! व्यापार ठीक रहेगा, कृषि में सफलता मिलेगी, नॉकरी
में उन्नति होगी! रिश्तेदारों से मतभेद के योग बनते है, सावधानी से कार्य करे! शत्रु पक्ष का  ध्यान रखे, सावधान रहें! किसी दोस्त से सहायता
मिलेगी! दिनांक ५,१५ शुभ है, २७ अशुभ है! राधा-कृष्ण आराधना चलने दे, लाभप्रद है!
तुला-->तुला राशि वाले जातको के लिए यह माह राजनीतिक क्षेत्र में सफलता वाला रहेगा! व्यापार  में लाभ मिलेगा, कृषि में हानि के योग है,
नॉकरी में अधिकारी खुश रहेगा! बिधार्थी को लाभ मिलेगा, पत्नि को कष्ट रहेगा, धन हानि के योग है! संगति सोचकर करे हानि हो सकती है! दिनांक १४,२८ शुभ है, १० अशुभ है! रामसीता की भक्ति लाभप्रद रहेगी!
वृश्चिक--> वृश्चिक राशि वाले जातको के लिए यह माह सामान्य रहेगा! पारिवारिक कलह के योग है, सावधानी से व्यवहार करे, शारीरिक कष्ट रहेगा,यात्रा से हानि होगी, विधा में अड़चन आएगी, पत्नि को कष्ट के योग, व्यापार मध्यम रहेगा,कृषि सामान्य रहेगी, नॉकरी में परेशानी आ
सकती है ध्यान से करे! किसी मित्र से सहयोग मिलेगा! दिनांक २,८ शुभ है, २४ अशुभ है! राम आराधना शुभ है!
धनु--> धनु राशि वाले जातको के लिए  यह माह संतान सुख वाला रहेगा ! विधार्थी को सफलता मिलेगी, वाहन से लाभ मिलेगा, समाज में सम्मान होगा, आर्थिक स्थिति में सुधार होगा! किसी पुराने मित्र से मिलन होगा! दिनांक ८,१६ शुभ है,१७ अशुभ है! शिव-शक्ति की आराधना शुभ है!
मकर--> मकर राशि वाले जातको के लिए यह माह पूर्ण सफलता वाला रहेगा! व्यापार में लाभ मिलेगा,माता से सुख मिलेगा,पारिवारिक सुख में वृध्दि होगी,कार्य क्षेत्र में सफलता मिलेगी! इसी के साथ स्थान-परिवर्तन के योग है! नॉकरी में उन्नति होगी, कृषि मध्यम रहेगी! दिनांक ३,१८ शुभ है,७ अशुभ है! देवी आराधना शुभ है!
कुम्भ--> कुम्भ राशि वाले जातको के लिए यह माह तीर्थ यात्रा एवं धर्म लाभ वाला रहेगा! माता-पिता को कष्ट के योग है, जमींन जायदाद से नुकसान होगा! नॉकरी  ठीक रहेगा , व्यापार अच्छा रहेगा! मित्रो से सहयोग मिलेगा! विधार्थी को सफलता मिलेगी! दिनांक ७,२८ शुभ है, २९ अशुभ है! श्री राम, हनुमान सेवा लाभप्रद है!
मीन--> मीन राशि वाले जातको के लिए यह माह आर्थिक लाभ वाला रहेगा! इस माह मांगलिक कार्य में खर्च होगा,व्यापार मध्यम रहेगा, कृषि लाभ देगी, नॉकरी में उन्नति होगी! स्वास्थ्य पीड़ा रहेगी, वाहन से भय रहेगा, यात्रा में कष्ट हो सकता है, अत: आवश्यक न हो तो यात्रा न करे!
दिनांक ५,२० शुभ है, ४ अशुभ है! श्री कृष्ण आराधना लाभप्रद है!  

Monday, May 28, 2012

गृह निर्माण में रखें वास्तु शास्त्र का ध्यान

- सुरेंद्र बिल्लौरे
प्रत्येक परिवार की पहली आवश्यकता होती है, अपना घर। मध्यम वर्ग इस सपने को संजोने के लिए जीवन भर संघर्ष करता है। जिस समय यह सपना सच होने जा रहा हो, तो हमें वह घर पूर्ण रूप से समृद्धि दें, इसका ध्यान रखना चाहिए। अत: वास्तु के अनुसार गृह निर्माण करवाना चाहिए।

किसी भी प्लॉट या भूमि पर गृह निर्माण करते समय यह ध्यान रखें कि भूमि (प्लॉट) के अग्नि कोण में पाक गृह (रसोई गृह), दक्षिण में शयन गृह, नैऋत्य कोण में अस्त्र-शस्त्रागार, पश्चिम में भोजन करने का गृह, वायव्य कोण में धन रखने का गृह, ईशान में देवालय एवं उत्तर में जल रखने का गृह रखें तथा उत्तर-पूर्व के मध्य बाथरूम होना चाहिए। इसी प्रकार

* दूध, दही, घी, सिरका, अचार का स्थान रसोई के बगल में होना चाहिए। श्रृंगार एवं औषधि सामग्री शयन गृह के बगल में होना चाहिए। विद्यार्थियों के पढ़ने का कमरा देवालय के बगल में होना चाहिए।

* घर के आस-पास बड़, पीपल, इमली, कैथ, नींबू, कांटे वाले एवं दूध वाले वृक्ष नहीं होना चाहिए। इस वृक्षों के घर के आस-पास होने से धन की हानि होती है।

* कुआं एवं जल का स्थान मुख्य द्वार से पूर्व ईशान, उत्तर अथवा पश्चिम में होने से धन प्राप्त होता है। सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है।

* अग्निकोण में संतान हानि, दक्षिण में गृहिणी का नाश, नैऋत्य कोण में गृह मालिक का नाश एवं वायु कोण में भय, चिंता बनी रहती है।

* भवन में स्तंभ लगाने की आवश्यकता हो, तो स्तंभ सम संख्या में लगवाना चाहिए। इनकी संख्या यदि विषम हो, तो अशुभ फल देते है।

* पूर्ण रूप से उपरोक्त विधि को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण करने से घर में सुख-समृद्धि, यश, वैभव एवं शांति प्राप्त होती है।

Wednesday, May 23, 2012

कालसर्प कब होता है

 कालसर्प कब होता है --> प्रत्येक जातक की कुंडली में नॉ ग्रहों  की स्थिति  अलग -अलग स्थान पर विराजमान होती है! राहु-केतु भी प्रत्येक की कुंडली में विराजमान रहते है!
जातक की कुंडली में जब सारे  ग्रह  राहु और केतु के मध्य में आ जाये,तब कालसर्प होता है! क्यों होता है, जानिए !
वैद के अध्ययन पर विचार करे, तो राहु का अधिदेवता काल  ओर प्रति 
अधिदेवता सर्प है,जबकि केतु का अधिदेवता चित्रगुप्त एवं प्रति अधिदेवता ब्रम्हाजी है! इस  पर ध्यान दे,या यह 
कहे , कि राहु का दाहिना भाग काल एवं बायाँ भाग सर्प है! इसीलिए राहु  से केतु की ओर कालसर्प योग बनता 
है,केतु से राहु की ओर से कालसर्प नही बनता है! राहु एवं केतु की गति बाममार्गी होने से स्पष्ट होता है, कि सर्प अपने बाई ओर ही मुड़ता है,वह दाई ओर कभी नही मुड़ता ! राहु एवं केतु सर्प ही है,और सर्प के मुँह में 
जहर ही होता है ! जिन जातको की कुंडली में कालसर्प होता है,उनके जीवन में असहनीय पीड़ा होती है! कई 
कालसर्प योग वाले जातक असहनीय पीड़ा झेल रहे है!और कुछ जातक सम्रध्दी प्राप्त कर  आनन्द की जिन्दगी
जी रहे है! इससे यह सिध्द होता है,कि राहु -केतु जिस पर प्रसन्न है,उसको संसार के सारे  सुख सहज में दिला देते है! एवं इसी के विपरीत राहु -केतु (सर्प)
कोर्धित हो जाहे,तो मृत्यु या मृत्यु  के समान कष्ट देते है! श्रष्टि का विधान रहा है,जिसने भी जन्म लिया है,वह 
मृत्यु  को प्राप्त होगा! मनुष्य भी उसी श्रष्टि की रचना में है, अत:मृत्यु तो अवस्यभावी है!उसे कोई  नही टाल  
सकता है परन्तु मृत्यु  तुल्य कष्ट ज्यादा दुखकारी है! जो व्यक्ति आर्थिक सम्पन्नता के मद में चूर हो जाता है,
जिसके कारण वह  माता-पिता अपने आश्रित भाई,बहन का सम्मान करके नही,बल्कि अपनी सेवा करवाकर खुश रहना चाहता है!
एवं उन्हें मानसिक रूप से दुखी करता है, उसी के प्रभाव के कारण उसे अगले जन्म में कालसर्प होता है! 
शास्त्रानुसार जो जातक अपने माता -पिता एवं पितरो की सस्चे मन से सेवा करते है, उन्हें कालसर्प योग अनुकूल प्रभाव देता है! एवं जो इन्हे दुःख देता है,कालसर्प योग उन्हें कष्ट अवश्य  देता है!
कालसर्प के कष्ट को दूर करने के लिए कालसर्प की शांति अवश्य  करना चाहिए ! एवं शिव आराधना करना चाहिये !

Friday, May 18, 2012

सूर्य का चन्द्र कुंडली में परिभ्रमण

सूर्य का चन्द्र कुंडली में परिभ्रमण--> प्रत्येक ग्रह परिभ्रमण करते है, एवं कुंडली में अलग-अलग भाव में विराजमान रहते है! सूर्य चन्द्र कुंडली में परिभ्रमण करते समय अलग-अलग भाव में जातक को क्या फल देता है, जानिये! - पं.सुरेन्द्र


प्रथम भाव--> सूर्य जातक की चन्द्र कुंडली में प्रथम भाव में परिभ्रमण के समय मान-सम्मान में कमी,धन हानि, भय एवं स्वभाव में उग्रता को बढ़ाता है! परिवार से दुरी भी बना सकता है, इसी के साथ जातक को बीमारी का भय बना रहता है!
ध्दितीय भाव--> सूर्य जब चन्द्र कुंडली में ध्दितीय भाव में भ्रमण करता है, जातक को धन-हानि आर्थिक कष्ट परिवार के साथ मतभेद तथा भय देता है!
तृतीय भाव-->सूर्य जब चन्द्र कुंडली में तृतीय भाव में भ्रमण करता है, तो जातक को पद की प्राप्ति,स्वभाव में सुधार,शत्रु पर विजय एवं परिवार में सुख-सम्मान दिलाता है!
चतुर्थ भाव-->सूर्य जब चन्द्र कुंडली में चतुर्थ भाव में भ्रमण करता है, तो जातक को अशांति,क्लेश,बीमारी,आर्थिक कष्ट देता है! इसी के साथ  पत्नि-पति के सम्बन्ध में दुरी बनाता है!
पंचम भाव-->सूर्य जब चन्द्र कुंडली में पंचम भाव में भ्रमण करता है, तो मानसिक बीमारी,अधिकारी से परेशानी,दुर्घटना का भय तथा परिवार से दुरी बनता है!
षष्टम भाव--> सूर्य जब चन्द्र कुंडली में षष्टम भाव में भ्रमण करता है, तो खुशिया तथा मानसिक शांति देता है! तथा शत्रुयो का नाश करता है!
सप्तम भाव--> सूर्य जब चन्द्र कुंडली में सप्तम भाव में भ्रमण करता है, तो उदर एवं मूत्रालय बीमारी तथा परिवार में आपसी समझ की कमी करता है!
अष्टम भाव--> सूर्य जब चन्द्र कुंडली में  अष्टम भाव भ्रमण करता है, तो आकस्मिक घटनाये घटित होने की संभावना बनी रहती है,आर्थिक तंगी,
धन हानि,रोग एवं लड़ाई-झगड़े करता है!
नवम भाव--> सूर्य जब चन्द्र कुंडली में  नवम भाव में भ्रमण करता है,तो मानसिक परेशानी,धन हानि, शश्रुयो का बढना, तथा अनायास खर्च,मान-सम्मान में कमी लता है!
दशम भाव--> सूर्य जब चन्द्र कुंडली में दशम भाव में भ्रमण करता है,तो इच्छायो की पूर्ति,उपहार,सम्मान तथा सुख शांति देता है! एवं प्रमोशन दिलाता है!
एकादश भाव-->सूर्य जब चन्द्र कुंडली में एकादश भाव में भ्रमण करता है,तो मांगलिक कार्य,नये मित्र एवं सुख की प्राप्ति करता है!
ध्दाद्श भाव--> सूर्य जब चन्द्र कुंडली में इस भाव में भ्रमण करता है,तो मानसिक - हानि, सोच में कमी,आर्थिक हानि, खर्च का बढ़ना,तथा दुर्घटना  का भय रहता है!
  सूर्य जब कष्ट दे, तो आदित्य स्त्रोत का पाठ करे, सूर्य को अर्ग दे !

Tuesday, May 15, 2012

ग्रहों के अशुभ फल

ग्रहों के अशुभ फल  --> प्रत्येक  जातक की कुंडली में  ग्रहों की स्थिति शुभ-अशुभ रहती है, एवं ग्रहों की दशा महादशा भी शुभ-अशुभ फल देती है,
एवं शनि की साढ़े साती भी जातक को शुभ अशुभ फल देती है! परन्तु इन सबके अलावा जातक के कर्म-कुकर्म  के आधार पर भी नवग्रह शुभ-अशुभ फल देते है!जानिये!
सूर्य-->सूर्य कब अशुभ फल देता है, जब जातक किसी भी प्रकार का टेक्स चुराता है, एवं किसी भी जीव की आत्मा को  कष्ट देता है! 
चन्द्र--> चन्द्र अशुभ फल कब देता है,जब जातक सम्मान-जनक स्त्रियों को कष्ट देता है, जैसे- माता,नानी,दादी,सास एवं इनके समान वाली स्त्रियों को कष्ट देता है, किसी से धोके से कोई वस्तु लेने पर भी चन्द्रमा अशुभ फल देता है!
मंगल--> मंगल अभुभ फल कब देता है, जब जातक अपने भाई से झगड़ा करे,भाई के साथ धोखा करे.एवं अपनी पत्नि के भाई का अपमान करे,तो
भी मंगल अशुभ फल देता है!
बुध--> बुध अशुभ फल कब देता है, जब जातक अपनी बहन,बेटी अथवा बुआ को कष्ट देता है, साली एवं मोसी को कष्ट देता है! यदि जातक हिजड़े
को कष्ट देता है, तो भी बुध अशुभ फल देता है!
गुरु-->गुरु कब अशुभ फल देता है, जब जातक पिता,दादा,नाना को कष्ट देता है, अथवा इनके समान पद वाले व्यक्ति को कष्ट देता है! एवं साधू, संतो को देने से भी गुरु अशुभ कष्ट देता है!
शुक्र--> शुक्र कब अशुभ फल देता है, जब जातक जीवन- साथी को कष्ट देता है! घर में गंदे एवं फटे  वस्त्र रखने,एवं ये  पहनने पर भी शुक्र अशुभ
फल देता है!
शनि-->शनि कब अशुभ फल देता है, जब जातक ताऊ,चाचा को कष्ट देता है,मजदुर की पूरी मजदूरी नही देता है.अथवा घर या दुकान के नोकरो को गाली देता एवं शराब, मांस खाने पर भी शनि अशुभ फल देता है! कुछ लोग मकान या दुकान किराये से लेते फिर बाद में खाली नही करते
या खाली करने के लिए पैसे मंगाते है, तो शनि अशुभ फल देता है!
राहू--> राहू कब अशुभ फल देता, जब जातक बड़े भाई को कष्ट देता है,या अपमान करता है! ननिहाल पक्ष का अपमान करने पर एवं सपेरे का दिल दुखाने पर भी राहू कष्ट देता है!
केतु --> केतु कब अशुभ फल देता जब जातक भतीजे,भांजे को कष्ट देता है,या उनका हक छीनता है! कुत्ते को मारने या किसी के ध्दारा कुत्ते को मरवाने पर मंदिर,मंदिर की ध्वजा तोड़ने पर केतु अशुभ फल देता है! किसी की झूठी गवाही देने पर भी राहू-केतु अशुभ फल देते है!
    अत: मनुष्य ने अपना जीवन व्यवस्थित जीना चाहिए, किसी का दिल नही दुखाना चाहिए! न ही किसी के साथ छल कपट करना चाहिए !










माधुरी दीक्षित



माधुरी का जन्म 15 मई 1967 को मुंबई में हुआ। पत्रिका के अनुसार जन्म के समय सूर्य वृश्चिक राशि पर परिभ्रमण कर रहा था, परिणामस्वरूप माधुरी धनवान एवं हर दृष्टि से सुखी है! यह योग दीर्घसूत्री भी बनाता है।

कुंडली में मंगल की स्थिति माधुरी को पराक्रमी बनाती है। मंगल जन्म के समय मकर राशि पर होने से भी माधुरी आर्थिक रूप से संपन्न है एवं परिवारिक सुख भी भरपूर है।

पत्रिका में स्थित बुध उन्हें कष्टों से बचाता है। जन्म के समय वृषभ का चन्द्रमा होने से वह खूबसूरत हैं एवं चन्द्र उन्हें दयालु बनाता है। वर्तमान में माधुरी की जो प्रसिद्धि है, वह गुरु की वजह से है। गुरु विलासी बनाता है, शुक्र लक्ष्मी सुख देता है। जन्म के समय शुक्र का तुला राशि पर परिभ्रमण जीवन भर सुखी एवं संपन्न बनाता है।

माधुरी को शनि संतान संबंधी तकलीफ दे सकता है। राहु सुख दे रहा है, केतु नेत्र की तकलीफ दे सकता है, अत: ध्यान दें।

माधुरी का जन्म सूर्य की महादशा में हुआ है, जिसका भोग्यकाल 1 वर्ष 2 माह 21 दिन रहा। वर्तमान में गुरु की महादशा चल रही है, जो कि 6/3/2004 से शुरू हुई थी, वह 6/3/2020 तक रहेगी। अभी गुरु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा चल रही जो कि 18/1/2012 से 18/9/2012 तक रहेगी।

माधुरी के लिए जून 2012 मध्यम रहेगा। जुलाई-अगस्त अच्छा बीतेगा। सितंबर एवं अक्टूबर 2012 मिश्रित भाग्य वाला रहेगा। दिसंबर कष्ट वाला हो सकता है। जनवरी 2013 ठीक रहेगा। फरवरी 2013 स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ दे सकता है। मार्च-अप्रैल 2013 अच्छा रहेगा। माधुरी को 28/6/2013 से 22/10/2013 तक सोच-विचार कर निर्णय लेना चाहिए। एक गलत निर्णय मुसीबत में डाल सकता है।

दिनांक 5,10,15 तारीख को बड़े निर्णय नहीं लेना चाहिए। 20/10/2013 से 20/12/2013 तक गलत विचार दिमाग में आ सकते है, विशेष ध्यान दें। माधुरी को विशेष तौर पर मूंगा, पुखराज का लॉकेट पहनना चाहिए।

Wednesday, May 9, 2012

भारतीय संस्कृति




भारतीय संस्कृति में भविष्यवाणी या यह कहे, की पुरानि  मान्यता बड़ी फायदेमंद रही है!   तकनीकी रूप से इनका कोई लिखित इतिहास नहीं है लेकिन पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह ज्ञान हस्तांतरित हो रहा है और मानना होगा कि इनके माध्यम से की गई भविष्यवाणियां अचूक सिद्ध होती हैं। प्रस्तुत है,* घर से चलते समय यदि बिल्ली रास्ता काट जाये, तो काम विगड जाता है!

* सामने की छींक लड़ाई-झगड़े को करवा सकती है। पीछे की छींक से  सुख मिलता है।

*

* दाईं तरफ की छींक धन को नष्ट करती है। बाईं तरफ की छींक से सुख मिलता है।


* आलू को सदा कृष्ण पक्ष में बोना चाहिए।

* एक बादल यदि दूसरे बादल में घुसे तो उसी समय पानी बरसे।

* यदि एक ढेले पर बैठकर चील बोले तो भारी वर्षा होगी।

* यदि सावन शुदि (शुक्ला) सप्तमी को आधी रात के समय बादल गरजे और पानी बरसे तो अकाल पड़ेगा।

* चित्रा नक्षत्र की वर्षा प्राय: सारी खेती नष्ट कर देती है।


* यदि एक महीने में दो ग्रहण हो तो राजा या मंत्री की मृत्यु होती है।