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Thursday, October 6, 2011

happy dashhara

सभी दोस्तों को, पाठको को दशहरे की शुभकामना !

Monday, October 3, 2011

अक्टूवर २०११ ज्योतिष की नजर से

इस माह सूर्य का कन्या राशि में परिभ्रमण करने से उत्तर के देशो में युद्ध का भय होने से अशांति के योग बनते है। पूर्व तथा दक्षिण के देशों में पीड़ा होने की संभावना है। मंगल (भौम) का कर्क राशि में परिभ्रमण करने से चोरों का भय, आपसी (जनता व सरकार) विरोध होगा। अशुभ फलों की अधिकता रहेगी। शासक निर्बल होंगे।

'कन्या राशि गते ज्ञे हि कांचनं शुद्ध कर्करा।' बुध के कन्या राशि में परिभ्रमण करने से शक्कर एवं सोने के व्यापारी को लाभ होगा। दोनों वस्तुओं के भाव बढ़ेंगे। ये स्थिति छ: माह तक रह सकती है, फिर भाव घटेंगे।

शुक्र का कन्या राशि में भ्रमण का प्रभाव सीधा कृषि पर पड़ेगा। खेती में फसल का नाश होता है। सभी प्रकार के अनाज महंगे होने के योग बनते है। शनि का कन्या राशि में परिभ्रमण करने से मध्यप्रदेश सरकार को सीधा असर पड़ेगा एवं जल पर भी सीधा असर पड़ेगा। पानी के शोषण होने के योग बनते है। इसी के साथ तेज वायु के योग बनते है।

बुध का 11 अक्टूबर को तुला राशि में प्रवेश करने से वर्षा में प्रभाव पड़ेगा एवं पृथ्वी पर क्लेश, अशांति होने की प्रबलता बढ़ेगी। युद्ध का भय बनता है।

4 सितंबर को शुक्र अपनी राशि तुला में प्रवेश करने से शांति एवं आरोग्यता होगी। सूर्य का भी राशि परिवर्तन कर तुला राशि में मध्य माह से प्रवेश होने के प्रभाव से पूर्व के देशों में सुभिक्ष आदि का सुख होगा, दक्षिण तथा पश्चिम के देशों में दुर्भिक्ष का भय, उ‍त्तर के देशों में युद्ध का भय व अशांति होगी।

इस माह सूर्य-बुध-शुक्र के एक ही राशि पर स्थित होने से वर्षा कम होगी। सभी अनाजों के भाव तेज होंगे। इस माह चर्तुग्रही योग बन रहे हैं। इसके प्रभाव से कहीं रक्तपात, कहीं प्राकृतिक प्रकोप की संभावना बनती है।

अक्टूबर माह की कुंडली में ग्रह गोचर पर आकाशीय मंडल के योग से दृष्टि डाले तो सूर्य-बुध एवं शुक्र के एक साथ बैठने से एवं शनि के सूर्य के पीछे होने से कुछ भागों में पानी की कमी, वर्षा का अवरोध होगा। कहीं तेज वायु के साथ छिटपुट बूंदाबांदी होगी।

ऋतु परिवर्तन के लक्षण दिखाई देंगे। शीत में वृद्धि होगी एवं रात्रि के तापमान में गिरावट आएगी। पर्वतीय क्षेत्रों में छिटपुट बूंदाबंदी होगी तथा शीत बढ़ेगी। मैदानी भागों में परिवर्तन आएंगे। तेज आंधी, तूफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त होने की संभावना बनती है।

Sunday, October 2, 2011

mantr ka upyog

mantra

                                                              ग्रह रक्षा मंत्र
                 ॐ ह्रीं चामुंड भ्रकुटी अट्टहासे भीम दर्शने रक्ष रक्ष चोरे:  वजुवेभ्य: अग्रिभ्य : स्वापदेभ्य: दुष्ट -
                                          जनेभ्य: सर्वेभ्य सर्वोपद्रवेभ्य गंडी ह्रीं हो ठ: ठ !
             इस मंत्र को १०८ बार पढ़कर मकान के चारो तरफ रेखा खीच देने से वह घर दुष्ट आत्माएं , भूत ,
 प्रेत ,चोर , डाकू तथा दुष्ट व्यक्ति या हिंसक जन्तुओ के प्रवेश का भय , बिजली गिरने व आग लगने का भय तक भी नही रहता ! किसी शुभ तिथि घड़ी नक्षत्र या चन्द्र ग्रहण सूर्य ग्रहण में दस हजार बार पाठ करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है !
                                ति मोहन  मंत्र
                          ॐ अस्य श्री सुरी मंत्र स्वार्थ वर्ण ! ऋषि इति शिपस स्वाहा !
           जिस स्त्री का पति उससे संतुष्ट न रहता हो उस स्त्री को निम्न मंत्र का १०८ बार प्रतिदिन नियम से जाप
करते हुए १०८ दिन तक पाठ करना चाहिए ! इससे पति पत्नी पर आकर्षित होगा तथा दोनों का जीवन आनन्दमय
हो जायेगा !
                               सरस्वती आकर्षण मंत्र
                                                 ॐ वाग्वादिनी स्वाहा मिन्सहरा !
                इस मंत्र को किसी भी शुभ तिथि में प्रात: उठकर नहा-धोकर पवित्र होकर सवा लाख बार जाप करने से
 देवी सरस्वती आकर्षित होकर विद्या दान देती है !
                        उपरोक्त मंत्र पूर्ण श्रद्धा के साथ करे पूर्ण लाभ होगा !

meen--ka--svbhav

meen--ka--svbhav

          राशी के प्रथम चरण में मेष एवं अंतिम चरण में मीन आता है! पूर्वाभाद्रपद के अंतिम चरण से रेवती नक्षत्र
के अंतिम चरण तक मीन राशी बिधमान रहती है! इस राशी का स्वामी गुरु है!
          इस लग्न में जन्म वाला जातक लग्न का स्वामी शुभ होने पर  सुंदर, रूपवान,धनी, ईमानदार अपने कार्य में
निष्ठां रखने वाला एवं कार्य क्षेत्र में माननीय पद पर पहुँचने वाला एवं सीधे स्वभाव वाला जरूरत मंद व्यक्ति की मदद
करने वाला होता है, एवं लेखक या कवि बनाने के योग बनते है! परन्तु लग्न में क्रूर ग्रह स्थित हो, या उसकी द्रष्टि
पड़ रही हो,तो जातक मादक द्रव्य लेने बाला या व्यभिचारी शराबी हो सकता है, अथवा होने के प्रबल योग रहते है!
लेखक, दुसरो की हमेशा सहायता करने वाला, गुप्त बिधा का ज्ञाता, देश भक्ति रखने वाला  व्यक्ति इसी लग्न में
पैदा होता है! इस लग्न के जातक समाज सेवी, राजनीती, तथा स्वास्थ्य सेवा में नर्स की नॉकरी करना ज्यादा पसंद
करते है!
          लग्नेश गुरु  तीसरे भाव में हो, तो भैयो की संख्या ज्यादा एवं बारहवे भाव में हो, तो पिता से सहयोग की सम्भावना बड़ती है!
        मीन लग्न में  उत्पन्न जातक की कुंडली में सातवे भाव में शनी या शुक्र की द्रष्टि पड़ जाये, तो तो पत्नी से तलाक होने संभावना बड़ जाती है!
        मीन लग्न में यदि शुक्र उच्च का हो तो व्यक्ति संगीत में रूचि रखने वाला, कलाकार बनाता है!
         मीन लग्न की कुंडली में मंगल बारहवे भाव में होने पर या उसकी दशा महादशा आने पर  किसी भी विभाग या
   देश का शासक बनाता है! परन्तु यदि शनी की द्रष्टि पड़ रही हो, तो जेल भिजवा सकता है!
         लग्नाधिपति गुरु यदि पंचम भाव में विराजमान हो, तो अनेक प्रकार की यात्रा करवाता है, एवं गुरु महादशा में उच्च पद पर पहुँचाता है!
         इस लग्न में बुध अच्छा नही होता है, इसकी (बुध) की महादशा में स्थान परिवर्तन कराता है! यदि बुध व्यय भाव में बैठा है, तो ग्रहस्थी में स्वास्थ्य खराब, मित्र, परिवार से झगडा करा सकता है!
      मीन लग्न वालो ने पुखराज धारण करना चाहिए!

      इति शुभम
 

अक्टूम्बर माह २०११ ध्दाद्श राशियों का फलादेश

मेष : मेष राशि वाले जातकों के लिए अक्टूबर का माह धर्म के लाभ वाला रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा। इस माह लंबी यात्रा के योग बनते हैं। शत्रु पक्ष से समझौता मिलेगा। पारिवारिक लोगों से पूर्ण सहयोग मिलेगा। किसी मित्र की सहायता से सारे कार्य पूर्ण होंगे। पत्नी का स्वास्थ्य नरम-गरम रहेगा। कृषि लाभ मिलेगा। व्यापार मध्यम रहेगा। दिनांक 3, 20, 29 शुभ है। दिनांक 6 अशुभ है। शिव शक्ति की आराधना शुभ रहेगी।

वृषभ : वृषभ राशि वाले जातकों के लिए यह माह शत्रु पक्ष पर विजय वाला रहेगा। विद्यार्थी की शिक्षा में सुधार होगा। पत्नी के पक्ष में स्थिति चिंता वाली रहेगी। राज्य कार्य से हानि की संभावना है। नौकरी में सब ठीक रहेगा। व्यापार अच्छा रहेगा। दिनांक 11, 15 शुभ है। 5 अशुभ है। दुर्गा आराधना लाभदायक रहेगी।

मिथुन : मिथुन राशि वाले जा‍तकों के लिए यह माह धन लाभ वाला रहेगा। स्वास्थ्य सुधार होगा। शत्रु पक्ष पर विजय मिलेगी। स्थान परिवर्तन से विशेष लाभ मिलेगा। वाहन सावधानी से चलाएं, दुर्घटना के योग बनते है। दिनांक 6,18 शुभ। 9 अशुभ रहेगी। राधा-कृष्‍ण की आराधना करें।

कर्क : कर्क राशि वाले जातकों के लिए यह माह पारिवारिक सुख वाला रहेगा। विद्यार्थी को रूकावट के योग बनते है। शत्रु पक्ष प्रबल हो सकता है, ध्यान दें। माता को कष्ट के योग। व्यापार मध्यम रहेगा। कृषि लाभ होगा। नौकरी में अधिकारी खुश रहेंगे। दिनांक 6, 12 शुभ, 6 अशुभ है। रामरक्षा स्त्रोत लाभप्रद है।

सिंह : सिंह राशि वाले जातकों के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा। स्वयं के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। शत्रु पक्ष से भय रहेगा। व्यापार मध्यम रहेगा। नौकरी में उन्नति के योग बनते हैं। कृषि सामान्य रहेगी। यात्रा में नुकसान के योग बनते है, ध्यान दें। चोट इत्यादि की संभावना बनती है। मित्र से सहयोग मिलेगा। दिनांक 2, 11 शुभ है। 14 अशुभ है। देवी आराधना शुभ है।

कन्या : कन्या राशि वाले जातकों के लिए यह माह भाई की उन्नति वाला रहेगा। साथ ही बहन की उन्नति के योग भी बनत‍े है। शारीरिक सुधार होगा। संगति का ध्यान दें। हानि के योग बनते है। व्यापार सामान्य रहेगा। नौकरी में अधिकारी अप्रसन्न हो सकते हैं। स्त्री से पूर्ण सहयोग मिलेगा। दिनांक 5, 18 शुभ। 22, 29 अशुभ है। राधा-कृष्‍ण की आराधना लाभप्रद रहेगी।

तुला : त‍ुला राशि वाले जातकों के लिए यह माह धर्म पर खर्च वाला रहेगा। खुद के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। आर्थिक खर्च होगा। पत्नी के पक्ष से विरोध होगा। व्यापार में लाभ मिलेगा। कृषि लाभ देगी। नौकरी में उन्नति के साथ प्रमोशन होने के योग है। दिनांक 1, 14 शुभ एवं 20, 26 अशुभ है। श्रीराम ‍भक्ति लाभ देगी।

वृश्चिक : वृश्चिक रा‍‍शि वाले जातकों के लिए यह माह परिवार में आर्थिक मजबूती वाला रहेगा (आय में वृद्धि होगी)। अपना ध्यान रखें, सिर संबंधी चोट की संभावना है। पुराने मित्र से सहयोग मिलेगा। व्यापार ठीक रहेगा। कृषि से हानि के योग, नौकरी में उन्नति होगी। दिनांक 7, 14 शुभ है। 9 अशुभ है। देवी आराधना लाभप्रद रहेगी।

धनु : धनु राशि वाले जातकों के लिए यह माह विद्यार्थी के लिए सफलता वाला रहेगा। रिटायर्ड कर्मचारी वर्ग की पदोन्नति के योग है। व्यापार अच्छा चलेगा। कृषि लाभ वाली रहेगी। नौकरी में अनबन होने के योग है। किसी की बात में आकर जीवन बर्बाद न करें। योग ठीक नहीं है। पत्नी से पूर्ण सहयोग रहेगा। दिनांक 4, 18 शुभ है। 23 अशुभ है। शिव शक्ति की आराधना लाभप्रद रहेगी।

मकर : मकर राशि वाले जातकों के लिए यह माह शुभ यात्रा वाला रहेगा। आय में वृद्धि होगी। शत्रु पर विजय प्राप्त होगी। पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक स्थिति रहेगी। दिनांक 1, 22, 29 शुभ है। 3 अशुभ। शिव आराधना करें।

कुंभ : कुंभ राशि वाले जातकों के लिए यह माह मिश्रित फल वाला रहेगा। अच्छे कार्यों से दूरी हो सकती है। पारिवारिक माहौल ठीक नहीं रहेगा। धार्मिक कार्यों के प्रति अविश्वास रहेगा। व्यापार ठीक रहेगा। कृषि से लाभान्वित होंगे। नौकरी सामान्य रहेगी। रिश्तेदारी में सतर्कता से काम लें। दिनांक 5, 18 शुभ है। 8 अशुभ। देवी भक्ति करें।

मीन : मीन राशि वाले जा‍तकों के लिए यह माह सामान्य लाभ वाला रहेगा। पत्नी के पक्ष से अनबन के योग बनते है। मित्रों से व्यवहार में सतर्कता रखें। विवाद के योग बनते है। व्यापार वृद्धि होगी। परंतु लाभ सामान्य रहेगा। कृषि के हानि के योग है। नौकरी में अधिकारी नाराज हो सकते हैं। दिनांक 6, 12, 24 शुभ है। 20 अशुभ। हनुमान जी की सेवा लाभप्रद है।


Thursday, September 29, 2011

गोरखनाथ का प्रिय मंत्र 'जंजीरा

गोरखनाथ का प्रिय मंत्र 'जंजीरा'  
परोपकार के लिए सिद्ध मंत्र
 

मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए नाना प्रकार की सिद्धियाँ की एवं उस पर विजय प्राप्त करने के बाद स्वार्थ-परमार्थ दोनों कार्य भी किए। किसी ने भैरव को, किसी ने दुर्गा को, किसी ने हनुमान जी को इस प्रकार सभी ने अपने-‍अपने हिसाब से देवताओं की आराधना कर सिद्ध किया और अपने कार्य को किया।

यहाँ पर गुरु गोरखनाथ को प्रसन्न करने के लिए मंत्र (जंजीरा) दे रहे हैं जो 21 दिन में सिद्ध होता है। साथ में गोरखनाथ जी का आशीर्वाद भी मिलता है इसे सिर्फ परोपकार के लिए ही कार्य में लें अपने स्वार्थ के लिए नहीं।

मंत्र (जंजीरा)
ऊँ गुरुजी मैं सरभंगी सबका संगी, दूध-माँस का इकरंगी, अमर में एक तमर दरसे, तमर में एक झाँई, झाँई में पड़झाँई, दर से वहाँ दर से मेरा साईं, मूल चक्र सरभंग का आसन, कुण सरभंग से न्यारा है, वाहि मेरा श्याम विराजे ब्रह्म तंत्र ते न्यारा है, औघड़ का चेला, फिरू अकेला, कभी न शीश नवाऊँगा,

पत्र पूर पत्रंतर पूरूँ, ना कोई भ्राँत ‍लाऊँगा, अजर अमर का गोला गेरूँ पर्वत पहाड़ उठाऊँगा, नाभी डंका करो सनेवा, राखो पूर्ण वरसता मेवा, जोगी जुण से है न्यारा, जुंग से कुदरत है न्यारी, सिद्धाँ की मूँछयाँ पकड़ो, गाड़ देवो धरणी माँही बावन भैरूँ, चौसठ जोगन, उल्टा चक्र चलावे वाणी, पेडू में अटकें नाड़ा, न कोई माँगे हजरता भाड़ा मैं ‍भटियारी आग लगा दूँ, चोरी-चकारी बीज बारी सात रांड दासी म्हाँरी बाना, धरी कर उपकारी कर उपकार चलावूँगा, सीवो, दावो, ताप तेजरो, तोडू तीजी ताली खड चक्र जड़धूँ ताला कदई न निकसे गोरखवाला,

डा‍किणी, शाकिनी, भूलां, जांका, करस्यूं जूता, राजा, पकडूँ, डाकम करदूँ मुँह काला, नौ गज पाछा ढेलूँगा, कुँए पर चादर डालूँ, आसन घालूँ गहरा, मड़, मसाणा, धूणो धुकाऊँ नगर बुलाऊँ डेरा, ये सरभंग का देह, आप ही कर्ता, आप ही देह, सरभंग का जप संपूर्ण सही संत की गद्‍दी बैठ के गुरु गोरखनाथ जी कही।

सिद्ध करने की विधि एवं प्रयोग :
किसी भी एकांत स्थान पर धुनी जलाएँ। उसमें एक लोहे का चिमटा गाड़ दें। नित्य प्रति धुनी में एक रोटी पकाएँ और वह रोटी किसी काले कुत्ते को खिला दें। (रोटी कुत्ते को देने के ‍पहले चिमटे पर चढ़ाएँ।) प्रतिदिन आसन पर बैठकर 21 बार जंजीरा (मंत्र) का विधिपूर्वक पाठ करें। 21 दिन में सिद्ध हो जाएगा।

किसी भी प्रकार का ज्वर हो, तीन काली मिर्च को सात बार मंत्र पढ़कर रोगी को खिला दें, ज्वर समाप्त हो जाएगा।

भूत-प्रेत यक्ष, डाकिनी, शाकिनी नजर एवं टोने-टोटके किसी भी प्रकार का रोगी हो, मंत्र (जंजीरा) सात बार पढ़कर झाड़ दें। रोगी ठीक हो जाएगा।

यदि आप किसी भी कार्य से जा रहे हो, जाने से पूर्व मंत्र को पढ़कर हथेली पर फूँक मार कर उस हथेली को पूरे चेहरे पर घुमा लें फिर कार्य से जाएँ, आपका कार्य सिद्ध होगा और आपको सफलता जरूर मिलेगी।

आत्मा एवं परमात्मा का मिलन आपके कार्य सिद्ध करेंगे

najar jhadaane ka mantr

नमो सत्य नाम आदेशगुरु को
ॐ नमो नजर जहाँ पर पीर न जानी
बोले छल सो अमरत बानी
कहो नजर कहाँ ते आई
यहाँ की ठौर तोहि कौन बताई
कौन जात तेरा कहाँ ठाम
किसकी बेटी कह तेरो नाम
कहाँ से उड़ी कहाँ को जाय
अब ही बस कर ले तेरी माया
मेरी बात सुनो चित लाए
जैसी होय सुनाऊँ आय
तेलिन तमोलिन चुहड़ी चमारी
कायस्थनी खतरानी कुम्हारी
महतरानी राजा की रानी
जाको दोष ताहि को सिर पड़े
जहार पीर नजर से रक्षा करे
मेरी भक्ति गुरु की शक्ति
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
उपरोक्त मंत्र को पढ़ते हुए मोर के पंख से बाल के सिर से पैर तक झाड़ दें। इस क्रिया से बालक की नजर उतर जाएगी और बालक स्वस्थ हो जाएगा

इसी प्रकार आप ग्रहण के दिन भगवती गायत्री की साधना कर मंत्र को सिद्ध कर लें फिर आप किसी भी बालक की नजर को झाड़ सकते हैं। अवश्य सफलता प्राप्त होगी। यह अचूक प्रयोग है। उपरोक्त सारे मंत्र विश्वास के साथ करें। कार्य अवश्य होगा।

Wednesday, September 28, 2011



रणब‍ीर कपूर का जन्म साठ के दशक के सुपर स्टार राज कपूर के परिवार में हुआ। कपूर परिवार ने फिल्मों में कई दशक देखें और फिल्मी इतिहास में अपने नाम की ख्याति पूरे विश्व में फैलाई। उसी परिवार में रणबीर का जन्म 28 सितंबर 1982 को बॉम्बे में श्रवण नक्षत्र में हुआ। उसी के प्रभाव से रणबीर धन‍ी एवं सुखी है।

रणबीर की कुंडली के अनुसार सूर्य ने उन्हें दीर्घसूत्री बनाया। मंगल एवं चंद्र ने भ्रमणशील के साथ-साथ फिल्मों में कदम जमाए। बुध जन्म के समय कन्या राशि पर भ्रमण कर रहा था, उसने भी धनवान बनाया एवं प्रसिद्धि दिलाई।

गुरु आपकी कुंडली में जिस राशि पर विराजमान है, उसने भी आपको धन-धान्य से सुखी बनाया। शुक्र केंद्र में होने से रणबीर को श्रेष्ठ कर्म वाला बनाता है। शनि जिस भाव में विराजमान है, यह आपको संपत्तिवान बनाता है। जन्म के समय शनि कन्या राशि पर भ्रमण कर रहा था, वह आपको उच्च स्थान दिलाता है।

आपका जन्म चंद्र की महादशा में हुआ है। वर्तमान में राहु की महादशा चल रही है, जो कि 2-5-1994 से 2-5-2015 तक रहेगी। वर्तमान में राहु महादशा में शुक्र की अंर्तदशा 20-11-2009 से 20-11-2012 तक रहेगी। इसके बाद सूर्य की अंतर्दशा 14-10-2013 ‍तक रहेगी। इसलिए आपको राहु और शुक्र की शांति अवश्य करानी चाहिए।

Tuesday, September 27, 2011

navratri ki shubh-kamanaye

  सभी दोस्तों को आगामी  नवरात्री की शुभकामनाये ! माँ  दुर्गा आप सबकी मनोकामना पूर्ण करे! एवं 
आपके जीवन में उन्नति का प्रकाश दे!

navratri ko no din lagaye bishrsh bhog

पहले  नवरात्रि के दिन मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। तथा शरीर निरोगी रहता है।

दूसरे नवरात्रि के दिन मां को शक्कर का भोग लगाएं व घर में सभी सदस्यों को दें। इससे आयु वृद्धि होती है।

तृतीय नवरात्रि के दिन दूध या दूध से बनी मिठाई खीर का भोग माँ को लगाकर ब्राह्मण को दान करें। इससे दुखों की मुक्ति होकर परम आनंद की प्राप्ति होती है।

मां दुर्गा को चौथी नवरात्रि के दिन मालपुए का भोग लगाएं। और मंदिर के ब्राह्मण को दान दें। जिससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय शक्ति बढ़ती है।

नवरात्रि के पांचवें दिन मां को केले का नैवैद्य चढ़ाने से शरीर स्वस्थ रहता है।

छठवीं नवरात्रि के दिन मां को शहद का भोग लगाएं। जिससे आपके आकर्षण शक्त्ति में वृद्धि होगी।

सातवें नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है।

नवरात्रि के आठवें दिन माता रानी को नारियल का भोग लगाएं व नारियल का दान कर दें। इससे संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

नवरात्रि की नवमी के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलेगी। साथ ही अनहोनी होने की‍ घटनाओं से बचाव भी होगा।