Total Pageviews

Thursday, November 18, 2010

jai shri krishna

प्रातः उठते समय गुरु को प्रणाम करे ....

Wednesday, November 17, 2010

jai shri krishna

दिवाली की हार्दिक शुभ कामनाएं

t

             !!    जय श्री कृष्ण !!
                                                < शुक्र ग्रह का परिभ्रमण >
                शुक्र ग्रह जब चन्द्र कुंडली में परिभ्रमण करता है ,तो जातक को अलग -अलग भाव [स्थान] में अलग -अलग शुभ -अशुभ परिणाम देता है ! देखे किस भाव में क्या प्रभाव देता है !
१.  प्रथम भाव में >  वैवाहिक जीवन का आनद देता है ! बिधा मे पूर्णता एवं बच्चे का जन्म देता 
                                है ,नए पद की प्राप्ति होती है ! तथा पूर्ण मनोरंजन देता है !
२.  दुसरे भाव में >  धन की प्राप्ति देता है , परिवार की बढ़ोत्री, बच्चे का जन्म एवं अविवाहित का
                                विवाह तथा शुभ काम कराता है !
३.  तीसरे भाव में > पद की प्राप्ति तथा प्रभुत्व बढ़ता है ! एवं जातक को धन की प्राप्ति देता है !
४.चतुर्थ भाव में >   प्रभाव एवं प्रभुत्व को बढ़ाता है ! जातक को धन की प्राप्ति देता है , अच्छे
                                व्यक्ति से मित्रता कराता है , अविवाहित का विवाह कराता है , एवं काम के
                                क्षेत्र में धन की प्राप्ति देता है !
५.   पंचम भाव में > विवाहित दम्पति को बच्चे का सुख देता है ! शत्रुओ का नाश कराता है , बड़े अधिकारियो
                             से सम्मान  एवं समाज में मान सम्मान में बडोतरी देता है !
६.  षष्टम भाव में >   मानहानि कराता है ! खर्च में बडोतरी देता है एवं राज्य से नोकरी से खतरा बनता है !
७. सप्तम भाव में >  किसी से गलत सम्बन्ध कराता है ! पत्नी को बीमारी एवं नीच प्रवृति के लोगो से सम्बन्ध
                            करता है ! स्त्री  द्वारा धन हानि तथा गृहस्थी में तनाव देता है !
८. अष्टम भाव में > स्वास्थ्य को स्वस्थ्य रखता है! शरीर ठीक रहता है , धन लाभ देता है ! इसी के साथ
                           जमीन जायदाद की प्राप्ति देता है !
९. नवम भाव में > मानहानि एवं शारीरिक सुख देता है ! और भोतिक सुख की पूर्णता करता है ! गृहस्थ सुख
                           देता है !
१०.दशम भाव में > कष्ट पद जीवन एवं तनाव देता है , लेकिन दोस्तों के सहयोग से अपने कार्य करवाता है !
११.एकादश भाव में > पूर्ण भोतिक सुख देता है ! विपरीत लिंग से सम्बन्ध बनवाता है ! मानसिक सुख एवं आर्थिक
                             सम्पन्नता  देता है !
१२. द्वादश भाव में > सामान्य फल देता है , जीवन को जीने के लिए अच्छे कार्य दिलाता है ! बेरोजगार को रोजगार
                             दिलाता है ! 
                                                           सुझाव एवं उपाय  
                             शुक्र अशुभ फल दे तो शुक्रवार के दिन किसी कन्या को या एक आंख वाले व्यक्ति को
              सफेद कपड़ा ,चावल , शक्कर ,दही , सफेद चन्दन , अमेरिकन डायमंड का दान करे ! एवं किसी ब्रह्मण से
              या स्वयं मंत्र के ३६००० जप कराए !
    मंत्र   >        !!    ॐ द्राम द्रिम द्रोम सह शुक्राय नमह    !! 

Tuesday, November 16, 2010

तिथि अनुसार आहार -विहार ज्योतिष की नजर से . 
१     प्रतिपदा को कुष्मांड [कुम्हड़ा पेढा] न खाए . ये धन का नाश करता है !
२     दूज को व्रहली [ छोटा बैगन या  कटहरी ] खाना नही चाहिए !
३     तीज को परमल खाना नही चाहिए .यह शत्रुओ को बडाता है !
४     चतुर्थी को मुली नहीं खाना चाहिए .ये धन का नाश करता है !
५     पंचमी को बैल नहीं खाना चाहिए . ये कलंकित करता है !
६      छट के  दिन नीम की  पत्ती नहीं खाना चाहिए एवं दातुन नहीं करना चाहिए . ये करने से नीच की योनी
        प्राप्त  होती है !
७     सप्तमी के  दिन ताड़ का फल नहीं खाना चाहिए . ये खाने से रोग उत्पन्न होता है !
८    अष्टमी के दिन नारियल नहीं खाना चाहिए . ये खाने से बुद्धि का नाश होता है !
९    नोमी के दिन लोकी नहीं खाना चाहिए . ये गाय के मांस समान होता है !
१०  दशमी को कलाम्बी [परवाल ] नहीं खाना चाहिए . ये भी गाय के मांस समान होता है !
११  एकादशी को शिम्बी [सेम] नहीं खाना चाहिए .
१२  द्वादशी को [पोई] पुतिका नहीं खाना चाहिए .
१३ तेरस को बैगन नहीं खाना चाहिए . ये तीनो दिन उपरोक्त लिखी वस्तुए खाने से पुत्र का नाश होता है !
१४  अमावस्या , पूर्णिमा ,सक्रांति, चतुर्दशी और अष्टमी रविवार श्राद्ध तथा व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल ,
      लाल  रंग का साग तथा कांसे के पात्र मे भोजन नहीं खाना चाहिए  !
१५  रविवार के दिन अदरक नहीं खाना चाहिए !

१६   कार्तिक मास में बैगन एवम माघ मास में मुली का त्याग करना चाहिए  !
१७   अंजली से या खड़े होकर जल नही पीना चाहिए  !
१८  जो भोजन लढाई करके बनाया गया हो ,जिस भोजन को किसी ने लांघ दिया हो , जिस पर ऍम सी .वाली स्त्री
     की नजर पड़ गई हो तो वह भोजन नही करना  चाहिए  . ये राछस भोजन होता है !
१९  लक्ष्मी प्राप्त करने वाले को रत में दही और सत्तू नही खाना चाहिए  !यहाँ नरक  की प्राप्ति करता  है !

Thursday, November 11, 2010

तंत्र -मन्त्र -टोटके > मानव हमेशा नईउर्जा के साथ जीना चाहता है | जिससे वह हमेशा प्रसन्न रह सखे |एवं उन्नति /उर्जा /नई उमंग के लिए स्वस्थ रहने की परम आवश्कता है \ प्रतेक  विद्वान /डोक्टर बैध ने यही लिखा है स्वस्थ मानव बिना परेशानी के अपना मन किसी भी उदेश्य को पूर्ण करने मे लगा सकता है \ हमारे यहा कहावत है . पहला सुख निरोगी काया \ निरोगी काया को रखने के लिए अपनाये कुछ टोटके -क्योकि स्वस्थ शरीर मे ही एक स्वस्थ आत्मा निवास करती है \ ज्वर {बुखार }नाशक टोटका . यदि आपका ज्वर सरे उपाय कर लेने के बाद भी ठीक नही हो रहा है .तो प्रभु पवनपुत्र हनुमान जी केशरण मेजाय सूर्यास्त के बाद हनुमान जी के मंदिर मे जाकर प्रणाम करके उनके चरणों का सिंदूर ले आये \ फिर ये मन्त्र ७ बार पढ़कर मरीज के मस्तिक पर लगा दे . बुखार ठीक हो जायेगा . {२}सफेदआकडे {मदर }की जड़ को लाकर स्त्री की वाई एवं पुरुष की दाहिनी भुजा पर  बांध दे . एक दिन छोर कर आने बाला बुखार ठीक हो जायेगा \

Tuesday, November 2, 2010

Dipawali Mantra

दीपावली पर करे कुछ छोटे मन्त्र सिद्ध टोटके ॐ चंद्रिके स्वाहा / बट के निचे बैठकर १० हजार जप सूर्योदय से पहले समाप्त करे ओर उसी स्थान पर घी से १ हजार मन्त्र से हबन करे तो चन्दिकाप्रसन्न होकर अमृत प्रदान करती है | परन्तु यह फल उसको मिलता है जब मानव हर तरह से पवित्र है |

Monday, November 1, 2010

दीपावली पर करे तंत्र मन्त्र सिध्द इ संसार की रचना के साथ ही बहुँत चीजो का अविष्कार हुआ है जैसे  जैसे मनुष्य ने उन्नति की अपने स्वार्थ लाभांश प्रुशार्थ परोपकार  के लिए कुघ न कुघ खोजता रहा है इ आप करे दीपावली पर कुघ प्रयोग  .रोगी को ठीक करने के प्रयोग |कृष्ण पझ मई अमावस्या की रत १२     बजे नहा धोकर नीले रंग के वस्त्र पहने असके बाद आसन पर नीला कपड़ा बिझाकर पूर्व मुख करके बैठे .इसके पश्चात दीपक चोई    मुखी   जलाये ये सामानरख ली नीला कपडा सवा गज {चर्मिथर } चौमुखी दीपक ४०नग मिटटी की गडवी १नग सफ़ेद कुषा आसन १नग बत्तिय ५१नग छोटी इलायची ११दाने खरिक ५नग नीले कपडे का रुमाल १नग दिया सलाई १नग ग लोंग११दाने तेल सरसों १किलो इतर १शिशि गुलाब के फुल ५नग गेरू की डाली लाडू ११नग बिधि / नीले कपडे के चारो कोने मेलाडू लोंग इलायची ,खरीक बांध ले ,फिर मिटटी के बर्तन में पानी भरकर गुलाब के फुल भी बहा रख ले फिर निचे लिखा मन्त्र पड़े मन्त्र पड़ते समय लोहे की सलाई से अपने चारो ओर लकीर खिचे ,इ मन्त्र इस प्रकार है ॐ अनुरागिनी मैथन परये स्वाहा शुक्ल पझे जपे ध्व्न्तव द्र्यते जपत पेट मन्त्र चालीस दिन तक करते रही पानी मई अपनी छाया को देखे जब मन्त्र पूरा हो जाये  सब सामान पानी में दल दे इ अब जिसका इलाज करना है उसका न्न्नाम नाम लेकर मन्त्र को बोले रोगी अच्घ्हा हो जायेगा
 श्री गणेशाय नमः
दीपावली पर विशष प्रार्थना
दीपावली पर सामान्य पूजा करने के बाद पुरे परिवार सहित उत्साह  से त्यौहार को मनाया जाता हे . रात्रि में स्वयं या ब्राहमण द्वारा भगवती को मनाने के लिए कनक धारा श्री सुक्तम का पाठ करना चाहिए . इसी के साथ गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए . भगवान श्री हरी सहित
dipavalee par veshash